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मुल्ला नसीरुद्दीन के चुटकुले

विवेक सिंह

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :46
मुखपृष्ठ : ई-पुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9836
आईएसबीएन :9781613012741

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मुल्ला नसीरूद्दीन न केवल हँसोड़ था, बल्कि वह अच्छा हकीम भी था और सामान्य लोगों के सुख-दुःख में सदा भागीदार भी बनता था, इसलिए वह अत्यन्त लोकप्रिय था।

57

मुल्ला को तेज जुकाम था। बुरी तरह नाक बह रही थी। अपनी स्थिति का ख्याल किये बिना ही पार्क की बैंच पर बैठे हुए एक साफ-सुथरे सज्जन के पास ही वह भी जा बैठा।

सज्जन कुछ देर तक तो मुल्ला का नाक सुड़कना और सूं-सूं बर्दाश्त करते रहे किन्तु अन्त में उन्हें मुल्ला से कहना ही पड़ा-'क्यों भई, तुम्हारे पास रूमाल नहीं है क्या?

'हों-हों, है क्यों नहीं? किन्तु मैं अपना रूमाल किसी दूसरे को नहीं देता हूँ, इसलिए आपको भी नहीं दे सकूँगा।'

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