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मुल्ला नसीरुद्दीन के चुटकुले

विवेक सिंह

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :46
मुखपृष्ठ : ई-पुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9836
आईएसबीएन :9781613012741

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मुल्ला नसीरूद्दीन न केवल हँसोड़ था, बल्कि वह अच्छा हकीम भी था और सामान्य लोगों के सुख-दुःख में सदा भागीदार भी बनता था, इसलिए वह अत्यन्त लोकप्रिय था।

39

बीसियों पैबन्द लगी शेरवानी पहनकर एक दिन मुल्ला बाजार में निकला तो उसके मित्र ने टोका-'किस जमाने की अचकन पहनकर बाजार घूमने निकले हो?'

'तुम जानते ही हो यार!' हँसकर मुल्ला बोला-'मैं परम्परा का पालन करने वाला आदमी हूँ। इस अचकन को मेरे स्वर्गीय बाबा अस्सी साल की उम्र तक पहनते रहे... उसके बाद इसे मेरे स्वर्गीय पिताजी ने अपनी पचहत्तर साल की उम्र तक पहना और अब मैं...' बस, बस, ऐसे ही परम्परावादी बनते हो तो अपनी शादी के बारे में परम्परा क्यों नहीं निभाई?'

'वाह भाई वाह! तुम कमाल करते हो, शादी के मामले में भी मैं बिस्कुल दुरुस्त हूँ। अस्सी साल की उम्र में मेरे बाबाजान मरे थे और तुम्हें छोड्कर पूरा शहर इस बात को जानता है कि वह मरते वक्त एकदम कुँवारे थे और यही हाल मेरे पिताजी का था।'

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