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मुल्ला नसीरुद्दीन के चुटकुले

विवेक सिंह

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :46
मुखपृष्ठ : ई-पुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9836
आईएसबीएन :9781613012741

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मुल्ला नसीरूद्दीन न केवल हँसोड़ था, बल्कि वह अच्छा हकीम भी था और सामान्य लोगों के सुख-दुःख में सदा भागीदार भी बनता था, इसलिए वह अत्यन्त लोकप्रिय था।

24

उस दिन मुल्ला का जिगरी दोस्त मुल्ला के घर पर ही सोया था। सवेरे दोनों सोकर उठे तो मुल्ला चारपाई पर बैठा-बैठा ही प्रभु से प्रार्थना करने लगा और दोस्त उठकर बाहर चलने लगा। तभी दोस्त की नजर कटी हुई दीवार की ओर गई। वह चीखा-' मुल्ला, ओ मुल्ला... दीवार में सेंध लगी हुई है। लगता है कोई चोर तेरा सारा माल-मत्ता साफ कर गया है।

'चुप भी रह कम्बख्त! तुझे परमात्मा का भी लिहाज नहीं है, जो मुझे प्रार्थना करते हुए तंग कर रहा है। तुझसे अच्छा तो रात वाला चोर ही था, जिसने तेरा लिहाज करके चोरी करते समय जरा भी खटपट नहीं की थी।'

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