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परसाई के राजनीतिक व्यंग्य

हरिशंकर परसाई

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :296
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9709
आईएसबीएन :9781613014189

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राजनीतिक विषयों पर केंद्रित निबंध कभी-कभी तत्कालीन घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए अपने पाठ की माँग करते हैं लेकिन यदि ऐसा कर पाना संभव न हो तो भी परसाई की मर्मभेदी दृष्टि उनका वॉल्तेयरीय चुटीलापन इन्हें पढ़ा ले जाने का खुद में ही पर्याप्त कारण है।

इसी समय उसकी नजर मार्शल की बीबी पर पड़ती है वह पूछता है - यह लड़की कौन है? मार्शल कहता है - वह मेरी बीवी है। राबर्ट काफी देर चकित रहता है। फिर कहता है - तो तुमने शादी कर ली है, यह तुम्हारी बीवी है - उसक तनाव घट जाता है। इस नई स्थिति को वह समझ नहीं पाता वह बार-बार कहता है - तो शादी कर ली। हर बार उसका तनाव कम होता जाता है फिर कहता है - तो तुमने शादी कर ली और उसके हाथ पाँव ढीले पड़ने लगते हैं, उसका शरीर शिथिल हो जाता है। वह भरी हुई आवाज में कहता है - तुमने शादी कर ली, वह रिवाल्वर जमीन से उठाकर धीरे-धीरे शिथिल शरीर से पहाड़ियों में चला जाता है।

लेखक को हेनरी की कुछ कहानियाँ पसंद हैं। उसकी एक कहानी है - जीवन का भँवरजाल। एक किसान दम्पत्ति हैं। गाँव में रहते हैं। दोनों में खटपट होती रहती है। एक दिन वे तय करते हैं कि हम तलाक ले लेते हैं। घोड़ा गाड़ी में बैठ दोनों नगर में न्यायाधीश की अदालत में जाते हैं। पाँच डालर फीस देकर वे तलाक ले लेते हैं।

बाहर मैदान में आते हैं। किसान पूछता है - तू अब कहाँ जाएगी? किसान की बीबी कहती है - मैं अपने भाई के पास जाऊँगी। किसान कहता है - मैं तुम्हें वहाँ गाड़ी में छोड़ देता हूँ। स्त्री कहती है - क्यों? अब हमारे संबंध ही नहीं रहे। मैं पैदल जाऊँगी।

थोड़ी देर बाद स्त्री कहती है - गाय को घास खिला देना। और अलमारी में बचा हुआ खाना रखा है। गरम करके खा लेना। किसान कहता है तुम्हें मेरी चिंता क्यों? अब हमारा कोई संबंध नहीं रहा। बड़ी देर दोनों बातें करते हैं और इस निश्चय पर पहुँचते हैं कि तलाक लेकर भूल की, उन्हें फिर शादी कर लेना चाहिए। अदालत खुलते ही वे शादी कर लेते हैं।

अब सवाल है कि शादी की पाँच डालर की फीस कहाँ से आएगी। किसान घर जाते न्यायाधीश पर झाड़ियों में झपट पड़ता है। वह पाँच डालर का अपना दिया नोट छीन लेता है। दूसरे दिन वे फिर शादी कर लेते हैं।

न्यायाधीश उस नोट को पहचान लेता है और मुस्कराता है। ऐसा है जीवन का भँवरजाल।


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