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परसाई के राजनीतिक व्यंग्य

हरिशंकर परसाई

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :296
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9709
आईएसबीएन :9781613014189

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राजनीतिक विषयों पर केंद्रित निबंध कभी-कभी तत्कालीन घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए अपने पाठ की माँग करते हैं लेकिन यदि ऐसा कर पाना संभव न हो तो भी परसाई की मर्मभेदी दृष्टि उनका वॉल्तेयरीय चुटीलापन इन्हें पढ़ा ले जाने का खुद में ही पर्याप्त कारण है।

उपन्यासों पर आधारित टेली फिल्मों में भी कभी-कभी चमत्कारी कथाएँ दिखाई जाती हैं। एक बांग्ला लेखक विमल मित्र काफी प्राचीन काल के हैं। लिखते ही जाते हैं। इनका जीवन यथार्थ 'किस्सा अलिफ लैला' या 'तिलस्मे होशरुबा' या 'हातिमताई' या 'भूतनाथ' जैसा होता है। बांग्ला साहित्य में विमल मित्र को गंभीरता से नहीं लिया जाता। वे 'किस्सा गो' माने जाते हैं। उनकी प्रतिष्ठा और धंधा हिंदी में उनके अनुवाद पर टिके हैं। जिंदगी-भर जीने के बाद भी वे जीवन यथार्थ नहीं समझे और चमत्कारों का सृजन करते रहते हैं। आकाशगंगा से नक्षत्र इस पृथ्वी पर लाते हैं। उनके उपन्यास पर आधारित सीरियल 'मुजरिम हाजिर' देखी। जमींदार चौधरी और उनके बेटे के अत्याचार तो वास्तविक हैं। लेकिन बेटे का बेटा सदानंद अद्भुत है। पाँच साल की उम्र में वह जान जाता है कि मेरे बाबा तथा बाप अत्याचारी और बेईमान हैं। बेहिसाब संपत्ति जमा कर ली है। एक कालीगंज की बहू जिसके रुपए चौधरी खा गए हैं शाप देती है कि इस धन का सुख चौधरी परिवार नहीं उठा सकेगा। बस सदानंद विवाह के बाद सुहागरात के पहले घर से भाग जाता है। इसलिए कि उसकी संतान नहीं हो और उसके बाद चौधरी परिवार खत्म हो जाय। सदानंद विवाह के पहले भी भाग सकता था। पर विमल मित्र को चमत्कार करना है तो उसकी पत्नी को चौधरी परिवार में डाल देते हैं। सदानंद कलकत्ता भागता है। वहाँ चमत्कार होते हैं। उसकी पत्नी दूसरा आदमी कर लेती है। सदानंद को दुनिया भर के अनुभव होते हैं, मगर वह कुछ नहीं सीखता। वही पाँच साल का ग्लानि से भरा भाबुक, अव्यवहारिक व आत्मपीड़ा वाला बालक रहता है। बाप के मरने पर वह संपत्ति में से एक हिस्से से स्कूल तथा अस्पताल अपने गाँव में खुलवाता है। पाँच लाख रुपए अपनी पत्नी कनकलता को देकर दूर प्रदेश में अज्ञातवास करने चला जाता है। वह समझता है कि पैसा अच्छे काम लग गया। पंद्रह साल अज्ञातवास के बाद एक चमत्कार के बाद वह फिर लौटता है। कलकत्ता में देखता है कि उसकी पली ने होटल खोल लिया है और 'कालगर्ल' का धंधा करती है। गाँव में स्कूल और अस्पताल बरबाद हो रहे हैं। निष्कर्ष : सदानंद समझता था कि मनुष्य अच्छा होता है पर अब जाना कि मनुष्य बुरा होता है। अपनी पहले की समझ के लिए वह अपने को अपराधी मानता है। मुजरिम हाजिर है। क्या कथा है! ऐसे सुखदायक और चमत्कारी कार्यक्रम देखने को मिल जाते हैं। हम गदगद् हो जाते हैं।


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