पीढ़ी का दर्द - सुबोध श्रीवास्तव Peedhee Ka Dard - Hindi book by - Subodh Srivastava
लोगों की राय

भाषा एवं साहित्य >> पीढ़ी का दर्द

पीढ़ी का दर्द

सुबोध श्रीवास्तव


E-book On successful payment file download link will be available
प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :118
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9597
आईएसबीएन :9781613015865

Like this Hindi book 7 पाठकों को प्रिय

185 पाठक हैं

संग्रह की रचनाओं भीतर तक इतनी गहराई से स्पर्श करती हैं और पाठक बरबस ही आगे पढ़ता चला जाता है।


सूरज का दर्द


आजकल
कुछ अनमना सा है
सूरज,
रोज उठता है
अँधेरे मुँह
यंत्रचालित सा-
नापने
रोशनी से अँधेरे तक का फासला।

दिन भर
चपटा पेट लिए
लड़ता है ज़िन्दगी के लिए,
झाँकता है
एड़ियों के बल उचककर
उजाले के बीच
अँधेरे में कैद
घरौंदों में,
सुनता है
झरोखों से छनकर आती
फुसफुसाती आवाज़े,
देखता है
रोशनी के खिलाफ
साज़िश करते लोग।

देर शाम घर लौटते
कंधों पर लाता है
अनकहा दर्द
रातभर करवट बदलता
सोता नहीं
सुबकता है सूरज
रोज व्यर्थ जाती
अंधेरा मिटाने की
खुद की कोशिश पर।

0 0 0


...पीछे | आगे....

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book