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कटी पतंग
कटी पतंग
प्रकाशक :
भारतीय साहित्य संग्रह |
प्रकाशित वर्ष : 2016 |
पृष्ठ :427
मुखपृष्ठ :
ईपुस्तक
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पुस्तक क्रमांक : 9582
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आईएसबीएन :9781613015551 |
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एक ऐसी लड़की की जिसे पहले तो उसके प्यार ने धोखा दिया और फिर नियति ने।
''इलाज के लिए नहीं-उस बच्चे को खत्म कराने के लिए।''
''लेकिन आपने यह पाप करने से इंकार कर दिया!''
''यस! यू आर राइट (हां, आप ठीक समझे); लेकिन आपको यह कैसे मालूम हुआ?''
''आपकी शराफत को देखकर,'' कमल ने मुस्कराते हुए उत्तर दिया और नमस्ते करके बाहर जाने लगा। फिर जाते-जाते रुककर बोला-''डाक्टर!''
डाक्टर ने पलटकर उसकी ओर देखा।
''अगर आपको यही बात पुलिस वालों से कहनी पड़े तो क्या आप कह देंगे?''
''क्यों नहीं-यह तो मेरा फर्ज है।''
डाक्टर की बात सुनकर कमल की आंखों में चमक आ गई और वह श्रद्धा से सिर झुकाकर दवाखाने से बाहर निकल गया।
डाक्टर काशीनाथ ने बढ़कर उस खिड़की का सहारा लिया जो गली की ओर खुलती थी। किवाड़ बन्द करने से पहले उसने देखा, कमल लगभग दौड़ता हुआ ढलान उतर रहा था।
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