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फ्लर्ट
फ्लर्ट
प्रकाशक :
भारतीय साहित्य संग्रह |
प्रकाशित वर्ष : 2016 |
पृष्ठ :609
मुखपृष्ठ :
Ebook
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पुस्तक क्रमांक : 9562
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आईएसबीएन :9781613014950 |
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जिसका सच्चा प्यार भी शक के दायरे में रहता है। फ्लर्ट जिसकी किसी खूबी के चलते लोग उससे रिश्ते तो बना लेते हैं, लेकिन निभा नहीं पाते।
98
10 अक्टूबर, सुबह 4.15
एक फाईव स्टार होटेल के परिसर में जब मैं और सोनू एक दूसरे के साथ जिन्दगी भर साथ निबाहने के वादे कर रहे थे जो बाहर संजय भीड़ के बीच घिरा मीडिया के सवालों के जवाब दे रहा था। एक अरसे बाद मुझे लोगों में अपने लिए फिर वही प्यार और क्रेज दिखायी दिया.... वही शोर! वही भीड़!
कुछ लड़कियाँ जो मेरी को मॉडल थीं वो इस खुशी के मौके पर काफी उदास दिखायी दीं लेकिन उदास होने वाले लोगों की गिनती बस यहीं तक नहीं थी।
राय साहब इस शादी से उतने ही दुखी हुए जितने वो अपना कारोबार डूबने पर होते क्योंकि उन्होंने अपनी एकलौती सोनाली के लिए कोई घर जमाई जैसी चीज चाही थी। कोई उन्हीं की तरह मशहूर, कारोबारी आदमी जिसके चारों ओर नौकरों की भीड़ लगी रहती हो। जिसकी कोई धाक हो इस समाज में, शहर में। जिसके साथ उनकी बेटी को किसी तरह का डर न हो। एक बेहद अमीर और संस्कारी लड़का जो सोनू को बहुत प्यार भी करे। मेरी तरह फ्लर्ट न हो। उन्हें नहीं पता था कि इस तरह का लड़का तो अब कम्प्यूटर के किसी 3डी प्रोग्राम पर ही डिजाइन हो सकता था। इसके अलावा उन्हें मैं दामाद के तौर पर कभी पसन्द नहीं था। वो खाना पूर्ती के लिए शादी में रहे और रस्में निभाई। सिर्फ सोनाली की मम्मी थी जिसने मुझे समझा और बेटे का मान दिया।
मैं कभी इस बात पर यकीन नहीं करता था कि जोड़ियाँ स्वर्ग में बनती हैं लेकिन मेरी ही अचानक हुई शादी ने ये साबित कर दिया कि हाँ! ये सच है। वो सारी लड़कियाँ जिनसे मेरे रिश्ते जुडे वो कहीं नहीं थीं और सोनू जिससे मैंने हमेशा खुद को दूर रखने की कोशिश की, वो उम्रभर के लिए मेरे साथ थी। मुझे वहीं मिला जहाँ मुझे उसकी जरा भी उम्मीद न थी।
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