ई-पुस्तकें >> भज गोविन्दम् भज गोविन्दम्आदि शंकराचार्य
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ब्रह्म साधना के साधकों के लिए प्रवेशिका
प्राणायामं प्रत्याहारं,
नित्यानित्य विवेकविचारम्।
जाप्यसमेत समाधिविधानं,
कुर्ववधानं महदवधानम् ॥30॥
(भज गोविन्दं भज गोविन्दं,...)
प्राणायाम – अर्थात् अपने जीवन की अभिव्यक्ति से सम्बन्धित कार्यकलाप पर नियंत्रण, प्रत्याहार – अपनी इन्द्रियों को उनके विषय से खींचना, विचार अर्थात् नित्य और अनित्य का विवेचन, और जप के साथ साथ समाधि प्राप्त करने का अभ्यास – इन्हें यत्नपूर्वक करो.... बहुत यत्नपूर्वक ॥30॥
(गोविन्द को भजो, गोविन्द को भजो,.....)
praanaayaamam pratyaahaaram
nityaanitya vivekavichaaram
jaapyasameta samaadhividhaanam
kurvavadhaanam mahadavadhaanam ॥30॥
Do pranayam, the regulation of life forces, take proper food, constantly distinguish the permanent from the fleeting, Chant the holy names of God with love and meditate,with attention, with utmost attention. ॥30॥
(Chant Govinda, Worship Govinda…..)
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