ई-पुस्तकें >> भज गोविन्दम् भज गोविन्दम्आदि शंकराचार्य
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ब्रह्म साधना के साधकों के लिए प्रवेशिका
गुरुचरणाम्बुज निर्भर भक्तः,
संसारादचिराद्भव मुक्तः।
सेन्द्रियमानस नियमादेवं,
द्रक्ष्यसि निज हृदयस्थं देवम् ॥31॥
(भज गोविन्दं भज गोविन्दं,...)
हे गुरु के चरणकमल के भक्त, अपनी इन्द्रियों और मन के नियमन के माध्यम से तुम शीघ्र ही सांसारिक बंधनों से छुटकारा पाओगे और उस देव को भी देख सकोगे जो तुम्हारे हृदय में वास करते हैं ॥31॥
(गोविन्द को भजो, गोविन्द को भजो,.....)
gurucharanaambuja nirbhara bhakatah
samsaaraadachiraadbhava muktah
sendriyamaanasa niyamaadevam
drakshyasi nija hridayastham devam !॥31॥
Be dependent only on the lotus feet of your Guru and get salvation from this world. Through disciplined senses and mind, you can see the indwelling Lord of your heart !॥31॥
(Chant Govinda, Worship Govinda…..)
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