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भगवान बुद्ध की वाणी

स्वामी ब्रह्मस्थानन्द

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :72
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9553
आईएसबीएन :9781613012871

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भगवान बुद्ध के वचन

तीन चेतावनियाँ

1. क्या तुमने संसार में कभी अस्सी, नब्बे या सौ वर्ष के बूढ़े, जराजीर्ण, तिकोने छप्पर के समान टेढ़े, झुके हुए, लाठी का सहारा लिये, लड़खड़ाते पाँववाले, शिथिल, बहुत पूर्व युवावस्था से रहित, टूटे दाँतवाले सफेद या छितरे बालवाले या गंजे, झुर्रीदार या सूजे अंगवाले पुरुष या स्त्री को नहीं देखा?

और क्या तुम्हारे मन में यह विचार कभी नहीं उठा कि तुम्हारा भी क्षय होगा और तुम इससे बच नहीं सकते?

2. क्या तुमने संसार में कभी ऐसे पुरुष या स्त्री को नहीं देखा, जो रुग्ण व्याधिग्रस्त और अत्यन्त अस्वस्थ हो, जो अपनी ही विष्टा में लिपटा हो और जिसे कुछ लोग उठाते तथा कुछ लोग खाट पर सुलाते हों? और क्या तुम्हारे मन में यह विचार कभी नहीं उठा कि तुम भी रुग्ण हो सकते हो और तुम इससे बच नहीं सकते?

3. क्या तुमने संसार में कभी किसी पुरुष या स्त्री के शव को मृत्यु के दो या तीन दिन बाद फूले हुए, काला या नीला हुए और विघटित हुए नहीं देखा? और क्या तुम्हारे मन में यह विचार कभी नहीं उठा कि तुम भी मृत्यु को प्राप्त होगे और तुम इससे नहीं बच सकते?

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