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अमृत द्वार

ओशो

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :266
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9546
आईएसबीएन :9781613014509

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ओशो की प्रेरणात्मक कहानियाँ

प्रश्न--शिक्षा के लिए?

उत्तर--शिक्षा के लिए नहीं, गृहस्थ की तैयारी के लिए क्योंकि दूसरा आश्रम गृहस्थ का है। वह ब्रह्मचर्य छोड़ेगा आखिर थोड़ी ही छोड़ देगा, फिर विद्या थोडे़ ही छोड़ देगा। वह पहले आश्रम से दूसरे आश्रम का फर्क क्या है? दूसरे आश्रम का फर्क यह है कि वह ब्रह्मचर्य छोडे़गा और कामुक जीवन में सम्मिलित होगा, जबकि लाइफ शुरू होगी उसकी। तीसरे जीवन में वह सेक्सुअल लाइफ छोडे़गा और वन की तरफ उन्मुख और चौथे जीवन में वह वन में प्रविष्ट हो जाएगा। व्यवस्था जो थी वह यह थी कि पहले मैं वह तैयारी करेगा काम निमंत्रण की। दूसरे में काम का भोग करेगा। तीसरे में काम भोग से जो बच्चा पैदा हुए हैं उनकी व्यवस्था जुटाएगा और चौथे में मोक्ष की यात्रा पर उन्मुख हो जाएगा। वह पूरी की पूरी व्यवस्था सेक्स से संबंधित है।

ब्रह्मचर्य का मतलब? ब्रह्मचर्य के काल में वह विद्याध्ययन करेगा। विद्याध्ययन ब्रह्मचर्य के काल का हिस्सा होगा, लेकिन साधना ब्रह्मचर्य की रहेगी। विद्या-अध्ययन भी जो है, वह भी विद्यार्थियों में आप क्या कराते रहे थे? विद्या-अध्ययन के नाम पर आप कराते क्या थे उसको? अगर उसको भी बहुत गौर से देखेंगे तो बहुत हैरानी होगी कि विद्या अध्ययन के नाम पर आप कराते क्या थे? विद्या अध्ययन के नाम पर धर्म के नाम पर रिचुअल सिखाते थे कि यज्ञ ऐसे करना, हवन ऐसे करना, पूजा ऐसी करनी यह सब सिखाते थे। धर्म तो कुछ सिखाया नहीं जाता था, रिचुअल सिखाया जाता था, कर्म-कांड सिखाया जाता था विद्या के नाम पर।

दूसरी मजे की बात है कि जितना भी जो लोग वहां गुरुकुल में सम्मिलित होते थे, वह कोई पूरे समाज को छूने वाली व्यवस्था न थी शूद्र तो सम्मिलित हो नहीं सकता था, शूद्र तो वर्जित था। चंडाल वर्जित था। सम्मिलित होते थे ब्राह्मणों के लड़के और राजाओं के लड़के। तो ब्राह्मणों को पौरोहित्य का काम सिखाते थे शिक्षा के नाम पर कि वे पुरोहित बनें और राजा के लड़कों को युद्ध का काम सिखाते थे, सैनिक का काम सिखाते थे। कुल जमा सारी शिक्षा यही थी। अन्यथा अगर हमारे पास शिक्षा का कोई व्यक्तित्व शास्त्र होता तो पांच हजार साल में पश्चिम हमारे आगे निकल जाता--तीन सौ वर्षों में? अगर कोई विद्या की व्यवस्थित आयोजना की होती तो हम पांच हजार साल से चिंतन कर रहे थे इस दिशा में, और हम कुल जमा यह समाज पैदा कर पाए जो हमारे पास है। आज हमारे पास सब कुछ उधार है। न तो एक मशीन है आपकी अपनी बनाई हुई, न आपके पास अपनी बनायी हुई एक दवा है, न आपके पास बनाई हुई आलपीन है, और न हवाई जहाज है। आप पांच हजार वर्ष से विद्या का अध्ययन कर रहे थे, ब्रह्मचारीगण इकट्ठे होकर--यहां तक आपका विज्ञान विकसित हुआ, यहां तक आपकी समझ विकसित हुई। क्या विकसित हुआ?

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