कहानी संग्रह >> 27 श्रेष्ठ कहानियाँ 27 श्रेष्ठ कहानियाँचन्द्रगुप्त विद्यालंकार
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स्वतंत्रता प्राप्ति के कुछ आरंभिक वर्षों की कहानियाँ
''मालूम हुआ कि उस नौजवान का नाम प्यारेलाल है-उम्र 27 वर्ष, शरीर और
ढांचा मध्यम। निम्न मध्यम श्रेणी का वह युवक किसी दफ्तर में क्लर्क था।
उसकी पत्नी उसकी अपेक्षा कहीं अधिक रोबीली थी और घर में उसी का हुक्म चलता
था। प्यारेलाल को पुलाव बहुत पसन्द थे और अपनी पत्नी से वह सदा पुलाव
बनाने की मांग किया करता था। पर उसकी पत्नी का कहना था कि अच्छा चावल अब
बहुत महंगा है और पूलाव बनाने में घी को पानी की तरह बहाना पड़ता है नतीजा
यह था कि प्यारेलाल को पुलाव नसीब नहीं होते थे।
''उस प्रभात से एक दिन पहले भी प्यारेलाल सदा की तरह सुबह भोजन कर दफ्तर
चला गया था। दफ्तर से वह सदा सांझ को घर वापस आया करता था। पर उस रोज उसके
दफ्तर में एकाएक छुट्टी हो गई और वह दोपहर के डेढ़ बजे ही घर वापस आ
पहुंचा। उसका खयाल था कि उसकी पत्नी या तो कहीं पड़ोस में गई हुई होगी, या
सो रही होगी। पर यह देख कर प्यारे लाल के आश्चर्य की सीमा न रही कि उसका
घर स्वादिष्ट पुलाव की सोंधी-सोंधी सुगन्ध से महक रहा है और घर के आंगन
में उसकी पत्नी और उसके तीन साले एक साथ भोजन कर रहे हैं। चारों के सामने
के थाल गरमागरम पुलाव से भरे हुए हैं और साथ ही खाली देगची पड़ी है। यह
कल्पनातीत दृश्य देख कर प्यारेलाल ने जो हँसना शुरू किया, तो हँसता ही चला
गया। जब तक प्यारेलाल की हँसी रुकी, तब तक वह पत्नी-भीत, हीन-मध्य श्रेणी
के क्लर्क से, ऊंची आवाज में गरमागरम पुलाव बेचने वाला एक पागल बन चुका
था।
''पहले ही दिन से प्यारे लाल पागलखाने की इस बस्ती में 'पुलाव वाले' के
नाम से प्रसिद्ध हो गया। मैंने उसका अध्ययन किया। एकदम साधारण कोटि का
व्यक्तित्व था उस आदमी का। अपनी पत्नी से वह जितना डरता था, उतना ही वह
अन्तर्मन से उससे घृणा करता था। प्यारेलाल को पहले भी सन्देह था कि उसकी
पत्नी उसकी कमाई पर अपने रिश्तेदारों को पालती है-पुलाव घटना से वह सन्देह
गहरे विश्वास के रूप में बदल गया।
''यों प्यारेलाल के व्यक्तित्व में अब भी किसी तरह की तीव्रता समाविष्ट
नहीं हुई थी। वह हर समय हँसता रहता और गरमागरम पुलाव के नारे लगाता रहता।
केवल अपनी पत्नी का नाम सुनते ही वह गम्भीर हो जाता। शुरू-शुरू में मैंने
उसकी पत्नी को उससे मिलने नहीं दिया, क्योंकि वह स्वयं उससे मिलने को राजी
न होता था। बाद में वह उससे मिलने को तैयार हो गया, पर जब उसकी पत्नी उससे
मिलने आई, तो वह उस पर बुरी तरह गरजा। दो-एक सिपाहियों की सुरक्षा में,
मेरी सलाह से वह औरत चुपचाप अपने पति की गरज सुनती रही।
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