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आचार्य श्रीराम शर्मा >> जागो शक्तिस्वरूपा नारी

जागो शक्तिस्वरूपा नारी

श्रीराम शर्मा आचार्य

प्रकाशक : युग निर्माण योजना गायत्री तपोभूमि प्रकाशित वर्ष : 2020
पृष्ठ :60
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 15496
आईएसबीएन :00000

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नारी जागरण हेतु अभियान

नई सामाजिक क्रान्ति आ सकती है


आज संसार विज्ञान और शिक्षा के फल से बहुत आगे बढ़ गया है। राष्ट्र और समाज अपनी सुरक्षा और स्वतंत्रता के लिए जी-जान से जुटे हुए हैं। संसार के समस्त विकसित देशों की नारियाँ पुरुष के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। सब प्रकार के कार्य, पेशे, कला, कौशल, युद्ध, चिकित्सा, व्यापार, वाणिज्य, सरकारी नौकरियाँ कर रही हैं। शासन प्रबंध और राजनीति में पूरी जिम्मेदारी से कार्य कर रही हैं। ऐसी विकसित परिस्थितियों में यदि भारतीय समाज ने अपने नारी वर्ग को समयानुकूल विकसित एवं जागरूक न किया, तो किसी समय राष्ट्रीय आपत्तिकाल में उनसे सहायता, सहयोग तो दूर, उनकी चेतना शून्यता एक दूसरी विपत्ति बन जाएगी। यदि राष्ट्रीय उत्थान कार्य में योग्य बनाकर नारी को भी संलग्न किया जाय, तो राष्ट्र की प्रगति दोहरी हो जाएगी।

डॉ० राधाकृष्णन के शब्दों में-'नारी' पुरुष के विलास का माध्यम नहीं है। वह पुरुष की माँ है और मानव के विकास का साधन है।'

गाँधीजी ने नारी में छुपी हुई शक्तियों को पहचाना था और सोती हुई भारतीय नारी को जैसे झकझोर कर उठा दिया था। उनके साथ अनेक पुरुषार्थिनी नारियों ने देश की क्रान्ति में भारी योगदान दिया था। बड़ी-बड़ी मुसीबतें सही थीं। आजादी की इस लड़ाई में महिलाओं के सक्रिय सहयोग से नारी समाज में आत्म विश्वास और साहस की समुन्नत भावनाएँ विकसित हुई हैं। भारत की महिलाएँ अपने शौर्य, साहस और आत्म बलिदान के कारण सफल नेतृत्व प्रदान कर सकती हैं और देश में सहज ही नई सामाजिक क्रान्ति आ सकती है।

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