लोगों की राय

नई पुस्तकें >> रौशनी महकती है

रौशनी महकती है

सत्य प्रकाश शर्मा

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2020
पृष्ठ :112
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 15468
आईएसबीएन :978-1-61301-551-3

Like this Hindi book 0

5 पाठक हैं

‘‘आज से जान आपको लिख दी, ये मेरा दिल है पेशगी रखिये’’ शायर के दिल से निकली गजलों का नायाब संग्रह


86

इसलिये अपना दिल जलाते हैं


इसलिये अपना दिल जलाते हैं
रौशनी हो तो लोग आते हैं

हो गया ख़्वाब, ख़्वाब का आना
अब तो बस चौंक-चौंक जाते हैं

सिर्फ़ पाने को जादुई काग़ज़
क़स्में बच्चों की लोग खाते हैं

जिसके उठने से आप गिर जाएँ
ऐसी दीवार क्यूँ उठाते हैं

राह तारीक़ है तो क्या ग़म है
हौसले मेरे जगमगाते हैं

0 0 0

...Prev | Next...

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

लोगों की राय

No reviews for this book