रौशनी महकती है - सत्य प्रकाश शर्मा Raushani Mahakti Hai - Hindi book by - Satya Prakash Sharma
लोगों की राय

नई पुस्तकें >> रौशनी महकती है

रौशनी महकती है

सत्य प्रकाश शर्मा

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2020
पृष्ठ :112
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 15468
आईएसबीएन :978-1-61301-551-3

Like this Hindi book 0

5 पाठक हैं

‘‘आज से जान आपको लिख दी, ये मेरा दिल है पेशगी रखिये’’ शायर के दिल से निकली गजलों का नायाब संग्रह


76

अंजाम हौसलों का अगर ले के आ गया


अंजाम हौसलों का अगर ले के आ गया
मेरे ही सामने मेरे ‘पर’ ले के आ गया

तौबा भी टूट जाएगी, उनका यक़ीन भी
कासिद कहीं जो उनकी ख़बर ले के आ गया

मेरे खुलूस में कहाँ नुक्तों की है जगह
लेकिन कोई जो ज़ेरो-ज़बर ले के आ गया

दिल में ही दब के रह गई जीने की आरज़ू
मुझको कहाँ ये मेरा हुनर ले के आ गया

‘फ़ाकिर’ की याद में कहूँ कुछ शे’र, दिल में था
तुम ये न सोचना कि हुनर ले के आ गया

0 0 0

...पीछे | आगे....

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

लोगों की राय

No reviews for this book