Raushani Mahakti Hai - Hindi book by - Satya Prakash Sharma - रौशनी महकती है - सत्य प्रकाश शर्मा
लोगों की राय

नई पुस्तकें >> रौशनी महकती है

रौशनी महकती है

सत्य प्रकाश शर्मा

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2020
पृष्ठ :112
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 15468
आईएसबीएन :978-1-61301-551-3

Like this Hindi book 0

5 पाठक हैं

‘‘आज से जान आपको लिख दी, ये मेरा दिल है पेशगी रखिये’’ शायर के दिल से निकली गजलों का नायाब संग्रह


64

कर ले तू भी सितमगरी कर ले


कर ले तू भी सितमगरी कर ले
हम फ़कीरों से मसखरी कर ले

खोलकर याद के दरीचों को
जून भी हो तो जनवरी कर ले

गुमरही में अभी कसर है कुछ
और कुछ देर रहबरी कर ले

भूल जा तू भी, मैं भी सब भूलूँ
आ तबीयत हरी-भरी कर ले

सब पे होती नहीं अता उसकी
वरना हर कोई शायरी कर ले

दूसरों की खुशी से हर कोई
चाहता है बराबरी कर ले

दिल के इस क़ीमती नगीने की
जिसका जी चाहे तस्करी कर ले

0 0 0

...पीछे | आगे....

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

लोगों की राय

No reviews for this book