Raushani Mahakti Hai - Hindi book by - Satya Prakash Sharma - रौशनी महकती है - सत्य प्रकाश शर्मा
लोगों की राय

नई पुस्तकें >> रौशनी महकती है

रौशनी महकती है

सत्य प्रकाश शर्मा

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2020
पृष्ठ :112
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 15468
आईएसबीएन :978-1-61301-551-3

Like this Hindi book 0

5 पाठक हैं

‘‘आज से जान आपको लिख दी, ये मेरा दिल है पेशगी रखिये’’ शायर के दिल से निकली गजलों का नायाब संग्रह


17

बयान देता है खुद आसमान, अच्छी है


बयान देता है खुद आसमान, अच्छी है
नज़र लगे न परिन्दे, ‘उड़ान’ अच्छी है

न खुशक़लाम अगर हो सको तो कम से कम
ख़मोश ही रहो, दिल की ज़बान अच्छी है

चमकते लफ़्ज़ निकाले हैं इन अंधेरों से
हमारे वास्ते दिल की खदान अच्छी है

ये ज़िन्दगी है यहाँ ग़म के ख़ूब जंगल हैं
कहीं मिले तो खुशी की मचान अच्छी है

तुम्हारा दिल है तुम अपने ख़याल खुद जानो
हमारे मुँह में हमारी ज़बान अच्छी है

ख़ुशी का चेहरा बदलता है वक़्त के आगे
मगर जो घटती नहीं ग़म की शान अच्छी है

ये जानता हूँ मुसीबत है प्यार में लेकिन
रहे बला से मुसीबत में जान अच्छी है

‘प्रकाश’ शे’र कहो इस तरह कि लोग कहें
तुम्हारा दिल भी है अच्छा, ज़बान अच्छी है

0 0 0

...पीछे | आगे....

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

लोगों की राय

No reviews for this book