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धर्म-निरपेक्षता की अनोखी मिसाल बादशाह अकबर की प्रेरणादायक संक्षिप्त जीवनी...
समृद्धि का हरा-भरा पेड़
विन्सेंट स्मिथ ने अकबर को संसार का सबसे धनी सम्राट कहा है। यह समृद्धि अकेले राजमहल तक नहीं सीमित थी, वह साम्राज्य के बडे़ नगरों तक व्याप्त थी। देश का व्यापारी वर्ग अति समृद्ध था। धन संपदा का आधार आंतरिक और बाह्य उद्योग, व्यापार थे। 1585 ई. में एक अंग्रेज यात्री फिच भारत आया था। आगरा से फतेहपुर सीकरी जाने के बाद उसने लिखा, ‘‘आगरा और फतेहपुर दो बहुत बड़े नगर हैं। दोनों लंदन से बहुत बड़े और घनी आबादी वाले हैं। आगरा और फतेहपुर के बीच 12 कोस (26 कि.मी.) का फासला है। सारे रास्ते में बाजार है जिसमें खाने-पीने का सामान और दूसरी चीजें मिलती हैं। रास्ता चलते हुए ऐसा लगता है कि अब भी शहर में हैं। इतनी भीड़ दिखाई देती है जैसे लगता हो बाजार में हों। ईरान तथा अन्य देशों के सौदागर बड़ी संख्या में आते हैं। यहां रेशमी और सूती कपड़ों, कीमती हीरे-जवाहरातों की खरीद-फरोख्त होती है। यहां से मैं बंगाल के सतगांव (मुख्य बंदरगाह) गया। मेरे साथ 180 (व्यापारिक) नावें चल रहीं थीं, उनमें नमक, हींग, अफीम, रांगा, गलीचे और दूसरी चीजें लदी हुई थीं।’’
व्यावसायिक लेन देन सिक्कों में होता था। दैनिक भुगतान के लिए जो तांबे का सिक्का प्रचलित था वह ‘दाम’ कहलाता था। सोने की मुहरें व अशर्फियां भी प्रचलित थीं जो ज्यादातर धन-संग्रह के काम आती थीं। अबुल फजल द्वारा दिए गए हवाले के अनुसार 1575 ई. में तांबे के ‘दाम’ के लिए 42, चांदी के सिक्कों के लिए 14 और सोने की मुहरों के लिए 4 टकसालें थीं। अलग-अलग स्थानों पर ढ़लने के बावजूद सिक्कों के वज़न में एकरूपता थी। धन अंतरण के लिए हुंडियों का प्रचलन भी था। जरूरत पड़ने पर अकबर अपने सूबेदारों को हुंडियां भेजता था।
एक अन्य यात्री टेरी ने लिखा है, ‘‘पंजाब बहुत बड़ा और उपजाऊ प्रांत है। लाहौर यहां का मुख्य शहर है जो भारत के व्यापारिक केन्द्रों में प्रमुख है।’’ लाहौर के बारे में यात्री मौनसेराट (1581 ई.) ने कहा है कि यह यूरोप या एशिया के किसी शहर से घटकर नहीं है। यहां की दूकानों पर हर तरह का सामान मिलता है और सड़कें जनता की भीड़ से पटी रहती हैं। बुरहानपुर के बारे में वह कहता है कि यह बहुत ही बड़ा, धनी और घनी आबादी वाला शहर है। अबुल फजल बताता है कि उम्दा से उम्दा चीजों के प्रदर्शन के लिए अहमदाबाद अद्वितीय है। काबुल (जो हिंदुस्तान का एक भाग था) भी व्यापार का बहुत बड़ा केन्द्र था। स्मिथ ने लिखा है, ‘‘देश के ऐसे बड़े नगरों की हालत के बारे में और भी विवरण दिए जा सकते हैं। इसमें संदेह नहीं रह जाता कि महत्वपूर्ण नगरों की शहरी आबादी बड़ी समृद्ध थी।’’
कश्मीर की तरह लाहौर में शाल-दुशालों के उत्पादन के लिए, आगरा और फतेहपुर सीकरी में गलीचों और अन्य बढ़िया माल की बुनाई के लिए, खानदेश के बुहरानपुर और गुजरात के पाटन में बढ़िया सूती कपड़ा तैयार करने के लिए अकबर ने प्रोत्साहन दिया। ढाका का सुनारगांव महीन, बढ़िया सूती वस्त्र (मलमल) के तथा पटना सूती कपड़ों, शक्कर, अफीम के मुख्य व्यापारिक केंद्र थे।
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