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मुल्ला नसीरुद्दीन के कारनामे

विवेक सिंह

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :56
मुखपृष्ठ : ई-पुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9837
आईएसबीएन :9781613012734

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हास्य विनोद तथा मनोरंजन से भरपूर मुल्ला नसीरुद्दीन के रोचक कारनामे

12. मैं कौन हूँ ?


एक बार मुल्ला नसीरूद्दीन बगदाद गए। उसको उन्होंने बहुत बड़ा और खूबसूरत शहर पाया। हर ओर सड़कों का जाल बिछा हुआ था और हर बाजार में गहमा-गहमी थी। मुल्ला यह दृश्य देखकर बहुत खुश हुए, पर उन्हें यह चिंता खाए जा रही थी कि यहाँ के लोग रास्ता कैसे याद रखते हैं। सैकड़ों सड़कें, गलियाँ और जनपथ है। दूसरी चिंता यह थी कि लोग खो नहीं जाते हैं? अंत में मुल्ला ने सोचा कि दूसरों की चिंता करना बेकार है। स्वयं अपने को याद रखो और खूब सावधानी से देख-भाल कर चलो। वह सोचने लगे कि अगर कहीं मैं स्वयं खो गया, तो कौन तलाश करेगा? यहाँ तो कोई जानने वाला भी नहीं है।

चलते-चलते वे एक सराय में पहुँचे और उसके स्वामी से कहा- 'मैं यहाँ ठहरना चाहता हूँ।'

उसने उन्हें एक बिस्तर निश्चित कर दिया। नसीरूद्दीन ने सोचा कि थोड़ी देर आराम करके फिर शाम को घूमने जायेंगे और जी भर कर बगदाद की सैर करेंगे, अत: वह अपने बिस्तर पर लेट गये। उनके बराबर जो आदमी लेटा हुआ था, वह कोई मसखरा था। मुल्ला जब लेटने लगे, तो उनके दिल में ख्याल आया, कहीं ऐसा न हो कि मैं सो जाऊँ और जब आँख खुले, तो स्वयं को पहचान न सकूँ। यह कैसे मालूम होगा कि मैं कौन-सा आदमी हूँ। इसलिए उन्होंने बराबर वाले मसखरे से अपनी परेशानी बयान की। मसखरा बोला-'इसमें परेशानी की कौन-सी बात है। वह देखो, सामने एक गुब्बारा पड़ा है। उसे उठाकर अपने पाँव से बाँध लो और सो जाओ। जब आँख खुलेगी, तो तुम गुब्बारे की मदद से स्वयं को तुरन्त पहचान लोगे।

मुल्ला की समझ में यह तरकीब आ गयी। उन्होंने झट गुब्बारा अपने पैर में बाँध लिया और सो गये। जब मुल्ला बेखबर सो गये, तो मसखरा अपने बिस्तर से उठा और चुपके से मुल्ला के पैर से गुब्बारा खोल कर अपने पैर में बाँध लिया। काफी देर बाद जब मुल्ला की आँख खुली, तो उन्होंने गुब्बारा मसखरे के पैर में बँधा पाया। इसलिए उन्होंने तय कर लिया कि मैं बराबर वाली चारपाई पर लेटा हूँ, पर इस निश्चय को उनके दिल ने स्वीकार न किया। अब बहुत चकराए और घबराहट में मसखरे को मुक्के मार-मार कर जगा दिया। जब वह उठा, तो उससे बोले- 'अरे भाई! मुझे ऐसा लगता है कि कुछ गड़बड़ हो गयी है। जरा उठो। देखो, तो क्या हुआ? तुम्हारे प्रस्ताव पर मैंने कार्य किया, पर यह सफल सिद्ध नहीं हुआ? जल्दी उठो!'

मसखरे ने कहा- 'अरे, क्या ऊधम मचा रखा है। क्या बात है। चुपचाप नहीं लेटा जाता!'

मुल्ला ने जवाब दिया- 'हमारी मुश्किल हल करो, नहीं तो हम पागल हो जायेंगे। गुब्बारा यह बताता है कि तुम तुम नहीं हो, मैं हूँ, लेकिन अगर तुमको मैं मान लिया जाए, तो खुदा के लिए मुझे बताओ कि मैं कौन हूँ?'

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