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मुल्ला नसीरुद्दीन के चुटकुले

विवेक सिंह

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :46
मुखपृष्ठ : ई-पुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9836
आईएसबीएन :9781613012741

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मुल्ला नसीरूद्दीन न केवल हँसोड़ था, बल्कि वह अच्छा हकीम भी था और सामान्य लोगों के सुख-दुःख में सदा भागीदार भी बनता था, इसलिए वह अत्यन्त लोकप्रिय था।

28

अपने प्रिय मित्र मदारीलाल के साथ शराब पीने के बाद रात को मुल्ला उसके घर ही सो गया। नशे में धुत्त होने के कारण रात में वह चारपाई से गिर पड़ा। 'धम्म' की आवाज सुनी तो मुल्ला चीखा-'मदारी देख तो, यह 'धम्म' से क्या गिरा? '

मदारीलाल भी नशे में था। कुछ देर तक तो उसने मुल्ला की बात अनसुनी कर दी किन्तु जब मुल्ला ज्यादा चीखा-चिल्लाया तो उसने चारपाई के नीचे नजर डाली। मुल्ला को नीचे पड़ा हुआ देखा तो मदारी हँसा और बोला- 'अरे, यह तो मुल्ला ही गिर पड़ा है।'

अब मुल्ला के चौंकने की बारी थी-'मुल्ला, यानी मैं! अरे रे- हाय-हाय अल्ला! अगर यह सच है कि मैं ही गिर पड़ा हूँ, तब तो जरूर कोई हड्डी-पसली भी टूट गई होगी।'

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