हिन्दी साहित्य का दिग्दर्शन - मोहनदेव-धर्मपाल Hindi Sahitya Ka Digdarshan - Hindi book by - Mohandev-Dharmapal
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हिन्दी साहित्य का दिग्दर्शन

मोहनदेव-धर्मपाल


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प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2017
पृष्ठ :187
मुखपृष्ठ : ई-पुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9809
आईएसबीएन :9781613015797

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हिन्दी साहित्य का दिग्दर्शन-वि0सं0 700 से 2000 तक (सन् 643 से 1943 तक)

तुलसीदास

जन्म-स्थान व समय- हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ महाकवि गोस्वामी तुलसीदासजी का जन्म कब और कहाँ हुआ, इस सम्बन्ध में बहुत मतभेद है। इनके जन्म-समय के सम्बन्ध में निम्न तीन मत हैं :-

(१) गोस्वामी जी का जन्म संवत् १५५४ में हुआ।

(२) उनका जन्म संवत् १५८९ में हुआ।

(३) गोस्वामी जी का जन्म संवत् १५८३ में हुआ।

इनमें से संवत् १५५४ का पक्ष ही अधिक प्रामाणिक है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और डा० श्यामसुन्दरदास आदि हिन्दी के विद्वान समालोचकों ने इसी पक्ष को मान्यता दी है। गोस्वामी जी के शिष्य महात्मा रघुबरदास के 'तुलसी-चरित्र' और बाबा वेनीमाधवदास कृत 'मूल गोसाई-चरित्र' में तो गोस्वामी जी की जन्म-तिथि भी दी हुई है जो इस प्रकार है।

पन्द्रह सौ चौवन विषै, कालिन्दी के तीर।
श्रावण शुक्ला सप्तमी, तुलसी धरेउ सरीर।।

अर्थात् संवत् १५५४ की श्रावण शुक्ला सप्तमी को गोस्वामी जी ने यमुना के तट पर जन्म लिया।

इस साक्ष्य के रहते हुए भी अनेक यूरोपियन विचारकों तथा उनसे प्रभावित भारतीयों ने भी गोस्वामी जी का जन्म १५५४ में न मान कर १५८१, १५८३, १५८९ और संवत् १६०० तक आगे खींचने का प्रयत्न किया है। इस सम्बन्ध में इन लोगों ने निम्न तर्क दिये हैं-

(क) यदि गोस्वामी जी का जन्म १५५४ में मान लिया जाय तो उनकी आयु १२६ वर्ष की ठहरती है, जो असम्भव-सी है क्योंकि यह तो निश्चित ही है कि उनकी मृत्यु संवत् १६८० से पूर्व नहीं हुई।

(ख) गोस्वामी जी का जन्म १५५४ में मान लेने पर रामचरितमानस का निर्माण ७७ वर्ष की बूढ़ी अवस्था में मानना पड़ेगा, क्योंकि रामचरितमानस का निर्माण संवत् १६३१ में हुआ-ऐसा गोस्वामी जी ने मानस में स्वयं लिखा है-

संवत् सोलह सै इकतीसा,
करउँ कथा हरिपद धर सीसा।
नौमी भौमवार मधुमासा,
अवधपुरी यह चरित प्रकासा।

इतनी वृद्ध अवस्था में गोस्वामी जी के लिए मानस जैसे उत्कृष्ट काव्य की रचना कठिन प्रतीत होती है।

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