Akbar - Birbal - Hindi book by - Gopal Shukla - अकबर - बीरबल - गोपाल शुक्ल
लोगों की राय

ई-पुस्तकें >> अकबर - बीरबल

अकबर - बीरबल

गोपाल शुक्ल

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :149
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9680
आईएसबीएन :9781613012178

Like this Hindi book 7 पाठकों को प्रिय

332 पाठक हैं

अकबर और बीरबल की नोक-झोंक के मनोरंजक किस्से


मूंछें नोचने की जुर्रत


एक दिन बादशाह अकबर ने दरबार में आते ही दरबारियों से पूछा, "किसी ने आज मेरी मूंछें नोचने की जुर्रत की। उसे क्या सज़ा दी जानी चाहिए।"

दरबारियों में से किसी ने कहा उसे सूली पर लटका देना चाहिए, किसी ने कहा उसे फांसी दे देनी चाहिए, किसी ने कहा उसकी गर्दन धड़ से तत्काल उड़ा देना चाहिए।

बादशाह नाराज हुए। अंत में उन्होंने बीरबल से पूछा, "बीरबल, तुमने कोई राय नहीं दी।"

"जहाँपनाह, खता माफ हो, इस गुनहगार को तो सज़ा के बजाए उपहार देना चाहिए", बीरबल ने जवाब दिया।

बादशाह हौले से मुसकराए और बोले, "क्या मतलब?"

"जहाँपनाह, जो व्यक्ति आपकी मूँछें नोचने की जुर्रत कर सकता है वह आपके शहजादे के सिवा कोई और हो ही नहीं सकता जो आपकी गोद में खेलता है। गोद में खेलते-खेलते उसने आज आपकी मूँछें नोच ली होंगी। उस मासूम को उसकी इस जुर्रत के बदले मिठाई खाने की मासूम सज़ा दी जानी चाहिए", बीरबल ने खुलासा किया।

बादशाह ने ठहाका लगाया और दरबारी बगलें झांकने लगे।

* * *


...पीछे | आगे....

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book