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नारी की व्यथा

नवलपाल प्रभाकर

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :124
मुखपृष्ठ : Ebook
पुस्तक क्रमांक : 9590
आईएसबीएन :9781613015827

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मधुशाला की तर्ज पर नारी जीवन को बखानती रूबाईयाँ


99. रहा डोल मन में मेरे


रहा डोल मन में मेरे
यही अजीब-सा सवाल
चार-चार धनी बेटे मेरे
जो आज बने हैं कंगाल

मोहताज हैं ये इनके
खड़े हैं पास ये जिनके

तब ममता मन में लाती हूँ
क्योंकि मैं इक नारी हूँ।


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