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कटी पतंग

गुलशन नन्दा

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :427
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9582
आईएसबीएन :9781613015551

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एक ऐसी लड़की की जिसे पहले तो उसके प्यार ने धोखा दिया और फिर नियति ने।


''इन जिम्मेदारियों को बोझ न समझना बहू! हम तुम्हें फूलों की तरह अपने पास रखेंगे। तू अपने सारे दुःख-दर्द भूल जाएगी।''

मां ने उसे असीस दी और चली गई। अंजना के दिल का बोझ हल्का हो गया। वह भय जो उसे दिन-रात डस रहा था, सहसा निकल गया। वे लोग जिनके बारे में सोच-सोचकर वह शंकित होती रहती थी, इतने भले और सीधे-सादे होंगे, ऐसा वह सोच भी नहीं सकती थी।

सहसा उसके बदन में एक लहर-सी दौड़ गई। उसने शीघ्रता से अपना सामान खोला और हर चीज अलमारी में सजाने लगी। पूनम के रेशमी जोड़े, जो अब केवल उसकी स्मृति के चिह्न थे, इतनी सावधानी से संभालने लगी जैसे वे सब उसी के हों। वह अपनी दुनिया को भूलकर पूनम बन जाना चाहती थी। वह अंजना को भूलकर उन स्मृतियों को अपनाने के लिए तैयार हो गई थी जिनसे उसका कोई मतलब नहीं था।

बरबस उसके हाथों में पूनम का वह जोड़ा और जेवरात आ गए जिन्हें पूनम ने अपने विवाह के अवसर पर पहना था। वह सुर्ख रंग का गोटेदार शादी का जोड़ा एक दुल्हन की कामना बनकर रह गया था। उसे देखकर अंजना का दिल दहल गया। यथार्थ फिर उसके सामने आ गया-वह यथार्थ जो उसके अपने ब्याह से सम्बन्धित था। वह जोड़ा जो दुल्हन बनकर उसने पहना था और जो उसके कलंक का कारण बनकर रह गया था।

यह सोचकर उसने अपना मुंह अपने उन हाथों में छिपा लिया जिनपर मेहंदी का रंग तो उड़ चुका था लेकिन कलंक की स्मृति अब तक उन लकीरों में छिपी हुई थी।

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