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कह देना

अंसार कम्बरी

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :165
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9580
आईएसबीएन :9781613015803

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आधुनिक अंसार कम्बरी की लोकप्रिय ग़जलें



न कर ग़रुर अभी है, अभी रहे न रहे


न कर ग़रुर अभी है, अभी रहे न रहे

कोई भरोसा नहीं ज़िन्दगी रहे न रहे

हमारे साथ उजाले हैं तेरी यादों के
हमारी राह में अब रौशनी रहे न रहे

मैं अपनी प्यास से ही प्यास को बुझाता हूँ
मेरे नसीब में कोई नदी रहे न रहे

मुझे यक़ीं है फ़िज़ायें तो गुनगुनायेंगी
किसी को याद मेरी शायरी रहे न रहे

सुना रहा है तो सुन लीजिये ग़ज़ल उसकी
न जाने बज़्म में फिर ‘क़म्बरी’ रहे न रहे

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