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भगवान महावीर की वाणी

स्वामी ब्रह्मस्थानन्द

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :60
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9554
आईएसबीएन :9781613012659

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भगवान महावीर के वचन

मंगल सूत्र

अर्हत् मंगल है।

सिद्ध मंगल है।

साधु मंगल है।

केवलि-प्रणीत धर्म मंगल है।


अर्हत् लोकोत्तम हैं।

सिद्ध लोकोत्तम हैं।

साधु लोकोत्तम हैं।

केवलि-प्रणीत धर्म लोकोत्तम है।


अर्हतों की शरण लेता हूँ।

सिद्धों की शरण लेता हूँ।

साधुओं की शरण लेता हूँ।

केवलि-प्रणीत धर्म की शरण लेता हूँ।

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