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जीवनी/आत्मकथा >> सिकन्दर

सिकन्दर

सुधीर निगम

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2017
पृष्ठ :82
मुखपृष्ठ : ई-पुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 10547
आईएसबीएन :9781613016343

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जिसके शब्दकोष में आराम, आलस्य और असंभव जैसे शब्द नहीं थे ऐसे सिकंदर की संक्षिप्त गाथा प्रस्तुत है- शब्द संख्या 12 हजार...


फिलिप के सामने कई अनुभवी घुड़सवारों ने नए घोडे़ पर चढ़ने का प्रयत्न किया पर असफल रहे। किसी प्रकार कोई बैठ भी गया तो उसे घोड़े ने गिरा दिया।

अंत में सिकंदर घोड़े के पास गया। देखा कि घोड़े की आंखों में भय व्याप्त है। उसने इधर-उधर देखा पर ऐसी कोई चीज नहीं दिखाई दी जो घोड़े को डराती हो। अचानक उसकी दृष्टि नीचे गई। वह तत्काल समझ गया कि घोड़ा अपनी परछाईं से डर रहा है। उसने घोड़े का मुंह सूरज की ओर कर दिया। परछाई पीछे हो जाने से घोड़े का भय दूर हो गया। रकाब में पैर डालकर सिकंदर घोड़े पर चढ़ गया। वल्गाएं खींच दीं और देखते-देखते घोड़ा हवा से बातें करने लगा।

मैदान के दो चक्कर लगाकर सिकंदर ने पिता के पास घोड़ा रोका और विजयी भाव से कूद पड़ा। सिकंदर की चतुराई और साहस पर फिलिप गद्गद हो उठा। उसने आनंद के अश्रु बहाते हुए पुत्र का मुख चूमा और कहा, ‘‘मेरे बेटे, तुम अपनी महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप एक बड़ा राज्य तलाश करना क्योंकि मकदूनिया तुम्हारे लिए बहुत छोटा है।’’ पिता का कथन भविष्यवाणी के रूप में सिद्ध हुआ क्योंकि बीस वर्ष के अंतराल के बाद, घोड़े को वश में करने वाले बालक सिकंदर ने पारसीक साम्राज्य पर विजय प्राप्त कर पूर्व में एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया।

फिलिप ने मुंहमांगी कीमत देकर वह घोड़ा सिकंदर के लिए खरीद लिया। सिकंदर ने उसका नाम रखा-‘बुकैफालेस’ जिसका अर्थ है ‘वृषभ शीर्ष’। बुकैफालेस सिकंदर की तमाम सामरिक विजयों का साक्षी रहा। सिकंदर को दूरस्थ भारत तक ले गया। अश्वों के इतिहास में वह विश्व का अन्यतम घोड़ा बन गया। ...

ईसा पूर्व 356 में फिलिप को तीन महत्वपूर्ण सूचनाएं एक साथ मिलीं। पहली, उसके महान सेनापति पार्मैनियोन ने इलीरिया नगर राज्य को पराजित कर बड़ी जीत हासिल की है। दूसरी, ओलम्पिक खेलों में उसका घोड़ा विजयी रहा है और तीसरी यह कि उसकी पत्नी ओलिम्पीआस ने एक बालक को जन्म दिया है।

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