|
आचार्य श्रीराम शर्मा >> कामना और वासना की मर्यादा कामना और वासना की मर्यादाश्रीराम शर्मा आचार्य
|
|
||||||
कामना एवं वासना को साधारणतया बुरे अर्थों में लिया जाता है और इन्हें त्याज्य माना जाता है। किंतु यह ध्यान रखने योग्य बात है कि इनका विकृत रूप ही त्याज्य है।
A PHP Error was encountered
Severity: Notice
Message: Undefined offset: -106
Filename: books/book_info.php
Line Number: 553
|
|||||
अन्य पुस्तकें
लोगों की राय
No reviews for this book










