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जीवनी/आत्मकथा >> सत्य के प्रयोग

सत्य के प्रयोग

महात्मा गाँधी

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2017
पृष्ठ :716
मुखपृष्ठ : ई-पुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9824
आईएसबीएन :9781613015780

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महात्मा गाँधी की आत्मकथा


कमेटी ने हवेली ( वैष्णव-मन्दिर) का भी निरीक्षण किया। हवेली के मुखियाजी से गाँधी परिवार का मीठा सम्बन्ध था। मुखियाजी ने हवेली देखने देना और सब सम्भव सुधार करा देना स्वीकार किया। उन्होंने खुद वह हिस्सा कभी नहीं देखा था। हवेली में रोज जो जूठन और पत्तल इक्ट्ठा होती, उन्हें पिछवाडे की दीवार के ऊपर फेंक दिया जाता था। और, वह हिस्सा कौओ औप चीलो का अड़ड़ा बन गया था। पाखाने तो गन्दे थे ही। मुखियाजी ने कितना सुधार किया, सो मैं देख न सका। हवेली की गन्दगी देखकर दुःख तो हुआ ही। जिस हवेली को हम पवित्र स्थान मानते हैं, वहाँ तो आरोग्य के नियमों का अधिक से अधिक पालन होने की आशा रखी जानी चाहिये। स्मृतिकारो ने अन्तर्बाह्य शौच पर बहुत जोर दिया हैं, यह बात उस समय भी मेरे ध्यान से बाहर नहीं थी।

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