हिन्दी साहित्य का दिग्दर्शन - मोहनदेव-धर्मपाल Hindi Sahitya Ka Digdarshan - Hindi book by - Mohandev-Dharmapal
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हिन्दी साहित्य का दिग्दर्शन

मोहनदेव-धर्मपाल


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प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2017
पृष्ठ :187
मुखपृष्ठ : ई-पुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9809
आईएसबीएन :9781613015797

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हिन्दी साहित्य का दिग्दर्शन-वि0सं0 700 से 2000 तक (सन् 643 से 1943 तक)

महादेवी वर्मा

श्रीमती महादेवी वर्मा का जन्म संवत् १९६४ में फर्रुखाबाद में हुआ। आपके पिता श्री गोविन्दप्रसाद वर्मा एम० ए०, एल-एल० बी भागलपुर कालेज के मुख्याध्यापक थे। इनकी माता श्रीमती हेमरानी देवी भी एक विदुषी और भक्त महिला थीं। कभी-कभी वे भक्ति-सम्बन्धी पद व कविता भी लिखा करती थीं। महादेवी जी के नाना भी व्रजभाषा के कवि थे। इस प्रकार हम देखते हैं कि महादेवी जी का जन्म एक विद्वान् और भक्त परिवार में हुआ। आपके दो भाई और एक बहन हैं। वे सभी उच्चशिक्षा-सम्पन्न हैं। एक भाई श्री जगमोहन वर्मा एम० एल०, एल-एल० बी० और दूसरे श्री मनमोहन एम० ए० हैं।

महादेवी जी की प्रारम्भिक शिक्षा इन्दौर में हुई। यहाँ इन्होंने छठी श्रेणी तक शिक्षा प्राप्त करने के साथ-ही-साथ चित्र और संगीत कला का अध्ययन भी किया। सूर, तुलसी और मीरा के साहित्य को आपने अपनी माता के मुख से बचपन ही में सुन रखा था। इस प्रकार बाल्यावस्था में ही आप में काव्य-प्रवृत्ति जागरित हो गई थी। संवत् १९७३ में आपका विवाह डाक्टर स्वरूपनारायण वर्मा के साथ हो गया। इससे इनकी शिक्षा उस समय छठी श्रेणी से आगे न चल सकी; क्योंकि आपके ससुर स्त्री-शिक्षा के विरोधी थे। ससुर जी की मृत्यु के बाद आपकी शिक्षा फिर प्रारम्भ हुई। और संवत् १९७७ में आप प्रयाग से मिडिल परीक्षा में प्रथम रहीं। इसलिए आपको छात्र-वृत्ति भी प्राप्त हो गई। संवत् १९८१ में आप मैट्रिक में भी प्रान्त-भर में प्रथम आई। अत: इस बार भी छात्र-वृत्ति लेकर आपने क्रमश: संवत् १९८३ में इन्टरमेडियट तथा सं० १९८५ में बी० ए० परीक्षाएँ पास कीं। बी० ए० परीक्षा में आपने दर्शन विषय भी लिया था, इसलिए आपको भारतीय दर्शन के अध्ययन का सुन्दर अवसर मिल गया। अन्त में आपने संस्कृत में एम० ए० की उपाधि भी प्राप्त कर ली।

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