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बृहस्पतिवार व्रत कथा

गोपाल शुक्ल

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :28
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9684
आईएसबीएन :9781613012390

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बृहस्पतिदेव की प्रसन्नता हेतु व्रत की विधि, कथा एवं आरती


बृहस्पतिवार की आरती


ॐ जय बृहस्पति देवा, ॐ जय बृहस्पति देवा।
छिन छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा।।
ॐ जय बृहस्पति देवा

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी।।
ॐ जय बृहस्पति देवा

चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता।
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता।।
ॐ जय बृहस्पति देवा

तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े।
प्रभू प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े।।
ॐ जय बृहस्पति देवा

दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी।
पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी।।
ॐ जय बृहस्पति देवा

सकल मनोरथ दायक, सब संशय टारी।
विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी।।
ॐ जय बृहस्पति देवा

जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे।
जेठानन्द आनन्दकर, सो निश्चय फल पावे।।
ॐ जय बृहस्पति देवा

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