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नारी की व्यथा

नवलपाल प्रभाकर

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :124
मुखपृष्ठ : Ebook
पुस्तक क्रमांक : 9590
आईएसबीएन :9781613015827

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मधुशाला की तर्ज पर नारी जीवन को बखानती रूबाईयाँ


80. कई गाँव छोड़, एक नहर पर


कई गाँव छोड़, एक नहर पर
वह ढीठ कहने लगा
माँ तुम बैठो आज यहीं पर
आऊँगा, मैं कह जाने लगा

मैं बोलती रही तब तक
आँखों से ओझल हुआ जब तक

घूम-घूम कर मैं हारी हूँ
क्योंकि मैं इक नारी हूँ।


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