सतयुग की वापसी - श्रीराम शर्मा आचार्य Satyug Ki Vapasi - Hindi book by - Sriram Sharma Acharya
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सतयुग की वापसी

श्रीराम शर्मा आचार्य

प्रकाशक : युग निर्माण योजना गायत्री तपोभूमि प्रकाशित वर्ष : 2005
पृष्ठ :32
मुखपृष्ठ : ई-पुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 15533
आईएसबीएन :0

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उज्जवल भविष्य की संरचना....

Satyug Ki Vaapsi - a hindi book by Shriram Sharma Acharya

इस सदी की समापन वेला में अब तक हुई प्रगति के बाद एक ही निष्कर्ष निकलता है कि संवेदना का स्रोत तेजी से सूखा है, मानवी अंतराल खोखला हुआ है। भाव संवेदना जहाँ जीवंत-जाग्रत् होती है वहाँ स्वतः ही सतयुगी वातावरण विनिर्मित होता चला जाता है। भाव संवेदना से भरे-पूरे व्यक्ति ही उस रीति-नीति को समझ पाते हैं, जिसके आधार पर संपदाओं का, सुविधाओं का सदुपयोग बन पाता है।

समर्थता, कुशलता और संपन्नता की आए दिनों जय-जयकार होती देखी जाती है। यह भी सुनिश्चित है कि इन्हीं तीन क्षेत्रों में फैली अराजकता ने वे संकट खड़े किए हैं, जिनसे किसी प्रकार उबरने के लिए व्यक्ति और समाज छटपटा रहा है। इन तीनों से ऊपर उठकर एक चौथी शक्ति है-भाव संवेदना। यही दैवी अनुदान के रूप में जब मनुष्य की स्वच्छ अंतरात्मा पर उतरती है तो उसे निहाल बनाकर रख देती है। इस एक के आधार पर ही अनेकानेक दैवी तत्त्व उभरते चले जाते हैं।

सतयुग की वापसी इसी संवेदना के जागरण, करुणा के उभार से होगी। बस एक ही विकल्प इन दिनों है-भाव संवेदना का जागरण। उज्ज्वल भविष्य का यदि कोई सुनिश्चित आधार है तो वह एक ही है कि जन-जन की भाव संवेदनाओं को उत्कृष्ट आदर्श और उदात्त बनाया जाए। इसी से यह विश्व उद्यान हरा-भरा, फला-फूला व संपन्न बन सकेगा।

अनुक्रम

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    अनुक्रम

  1. लेने के देने क्यों पड़ रहे हैं?
  2. विभीषिकाओं के पीछे झाँकती यथार्थता
  3. महान् प्रयोजन के श्रेयाधिकारी बनें
  4. संवेदना का सरोवर सूखने न दें
  5. समस्याओं की गहराई में उतरें
  6. समग्र समाधान : मनुष्य पर देवत्व के अवतरण से
  7. बस एक ही विकल्प-भाव-संवेदना
  8. दानव का नहीं, देव का बरण करें

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