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जीवनी/आत्मकथा >> हेरादोतस

हेरादोतस

सुधीर निगम

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2017
पृष्ठ :39
मुखपृष्ठ : ई-पुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 10542
आईएसबीएन :9781613016305

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पढ़िए, पश्चिम के विलक्षण इतिहासकार की संक्षिप्त जीवन-गाथा- शब्द संख्या 8 हजार...

प्रथम सुरक्षित इतिहास के लेखक हेरोदोतस का जन्म 490 वर्ष ई.पू. में दक्षिणी-पश्चिमी एशिया माइनर (तुर्की) स्थित अलकारनासोस में हुआ था। सिसरो ने उन्हें ‘इतिहास का जनक’ कहा है। अपने इतिहास-ग्रंथ ‘इस्तोरिया’ का मुख्य विषय उन्होंने यूनान और पारसीक के मध्य युद्ध को रखा है। हेरोदोतस ने अनेक देशों की यात्रा की थी (वे भारत की पश्चिमी सीमा तक आए थे) और वहां से प्राप्त सूचनाएं यथातथ्य रूप में अपने इतिहास में दर्ज कीं। इस कारण उनके इतिहास में कुछ अयथार्थ भी दर्ज हो गया। अतः उनके लिए कहा जाता है कि जितने वे तार्किक थे उतने ही आशु-विश्वासी, जितने ज्ञानी थे उतने ही मूर्ख।

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हेरादोतस

प्रथम इतिहासकार

प्रथम प्राप्य इतिहास ग्रंथ का लेखक हेरादोतस था जो पारसीक साम्राज्य के अधीन दक्षिण पश्चिम एशिया माइनर के नगर हलिकारनासोस का निवासी था। अपने ग्रंथ इस्तोरिया (लेटिन में जाकर जो ‘हिस्ट्री’ बना) का मुख्य विषय उसने यूनान और पारसीक साम्राज्य के बीच युद्ध को बनाया। इस युद्ध में पारसीकों की हार होती है। विषय की विवेकपूर्ण ढंग से विस्तारपूर्वक विवेचना करने के लिए वह युद्ध से 60 वर्ष पूर्व की घटनाओं के वर्णन से इतिहास प्रारंभ करता है। ग्रंथ दो भागों में है।

प्रथम भाग में पारसीक साम्राज्य के उदय के वर्णन के साथ-साथ तत्कालीन ज्ञात संसार के देशों- एशिया, मिस्र, मध्य एशिया और लीबिया में निवास करने वाली विभिन्न जातियों का व्यापक सर्वेक्षण करते हुए उनके रीति-रिवाजों का भी उल्लेख किया गया है। यत्र-तत्र प्रसंग बदलने पर 600 ई.पू. के मध्य के यूनान के क्रमिक इतिहास पर भी वह प्रकाश डालता है।

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